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Sunday , 20 August 2017
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चतुर्वेदी डॉक्टरों ने पढाया स्वस्थ जीवन शैली का पाठ

ऐसा कौन है जो कभी बीमार ना हो या किसी को कभी डॉक्टर की ज़रुरत ना पड़ी हो . ऐसा में हम सभी अपने परिवार और दोस्तों से पूछते हैं कि किस डॉक्टर को दिखाया जाए . लेकिन बहुत बार ऐसा भी होता है कि डॉक्टर की दी हिदायत या बताये हुए मेडिकल टेस्ट हमें लगता है कि गैर ज़रूरी हैं और केवल बिल बढाने के लिए किये जा रहे हैं. आज के समय में यह भी देखा जाता है कि बाज़ार में मेडिकल टेस्ट को भी एक धंधा ही बनाया जा रहा है . इस समस्या का समाधान क्या है ? समाधान की दिशा में एक छोटी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण पहल की पालागन डॉट कॉम ने . इंडियन हैबिटैट सेण्टर में रविवार को आयोजित “चतुर्वेदी डॉक्टर कॉन्क्लेव” में देश के विभिन्न हिस्सों से आये डॉक्टरों ने स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और अपने अनुभव साझा किये . कार्यारम के संयोजन किया डॉ अभिमन्यु चतुर्वेदी ने . प्रमुख वक्ताओं में सबसे पहले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)  डॉ. वेद चतुर्वेदी ने “ Rheumatology in day to day life”  पर अपने विचार साझा किये . कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लगभग २०० लोगों के लिए इस सन्देश में बहुत कुछ था जो दिन पर दिन बढती गठिया की समस्या से निबटने के लिए प्रेरणा देने वाला था . डॉ हरित चतुर्वेदी, जो कि कैंसर के उपचार के क्षेत्र में पिछले 28 वर्षों से काम कर रहे हैं और मैक्स हॉस्पिटल की 80 डॉक्टरों की टीम के मुखिया हैं, ने बताया कि विश्व में 90 के दशक में जो हालात थे उनमें क्रन्तिकारी रूप से बदलाव आये हैं . उन्होंने बताया कि कैंसर होने की दशा में घबराना नहीं है या कहना तो गलत होगा लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि कैंसर का मतलब अचानक मृत्यु नहीं है . डॉ हरित ने कहा कि डॉक्टरों को चाहिए कि कैंसर के मरीज़ को अगर ठीक करने का रास्ता ना दिखे और लगे कि वह कुछ ही दिनों का मेहमान है तो यह ध्यान रख्हें कि जितना ज़रूरी उसकी ज़िंदगी को लम्बा करना है उससे कहीं ज्यादा यह ज़रूरी है कि उसकी ज़िन्दगी की क्वालिटी बेहतर की जाये ताकि वो अपने अंतिम दिनों में ज़िन्दगी जी भर के जिए . उन्होंने कहा कि अभी तक कैंसर के लगभग 27 प्रकार हैं जिनमें उपचार की गुंजाईश इस पर निर्भर करती है कि कितनी जल्दी वो डिटेक्ट किया जाता है .

इस कड़ी में डॉ अनिल चतुर्वेदी ने ‘हेल्दी एजिंग ‘ के विषय में अपने विचारों से सभी को प्रभावित किया . डॉ अनिल ने विज्ञानं की भाषा के साथ साथ प्रचलित कहावतों का भी समुचित प्रयोग करते हुए उपस्थित डॉक्टरों और अन्य मेहमानों को बताया कि किस तरह जीवन शैली ठीक रखना ही सभी रोगों से दूर रहने का मूलमंत्र है . उन्होंने विभिन्न उदाहरणों द्वारा बताया कि किस प्रकार खान पान, दैनिक कसरत या सैर और तनाव रहित ज़िन्दगी ही वास्तव में बढती उम्र में आपको एक गुणवत्तापूर्ण ज़िन्दगी दे सकती है .

नॉएडा से आई डॉ शोभा चतुर्वेदी ने आज के समय में बढती ‘इनफर्टिलिटी ‘ के कारण और इससे बचने के लिए विभिन्न कारकों पर प्रकाश डाला . डॉ शोभा ने बताया कि वास्तव में अधिकतम 30 वर्ष की आयु को ही महिलाओं में नार्मल फर्टाइल के लिए आदर्श उम्र माना जाता है क्योंकि इसके बाद पुरुष और महिलाओं दोनों में ही प्रजनन से सम्बंधित प्राकृतिक सामर्थ्य कम होने लगता है . उन्होंने बताया कि आज की जीवन शैली में तनाव के अलावा मोबाईल और लैपटॉप दो ऐसी चीज़ें हैं जो हमारे डी एन ए को नुक्सान पहुंचा रही है 

डॉ अभिमन्यु चतुर्वेदी ने ओरल हेल्थ के विषय में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी साझा की . उन्होंने बताया कि लापरवाही की वजह से हमारे दांत तब ख़राब होने शुरू हो जाते हैं जब छोटे बच्चे के दांत आये भी नहीं होते . उन्होंने बताया कि ओरल हेल्थ ठीक ना होने की दशा में व्यक्ति के सम्पूर्ण शारीर पर इसका असर पड़ता है .

आगरा से आये डॉ संजय चतुर्वेदी ने बताया कि विभिन्न स्टडीज में पाया गया है कि जो लोग पुरातन जीवन यानि गाँव वाला जीवन जीते हैं उनको स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं . इसके अनुपात में शहरी जीवन जीने वाले अधिक बीमारियों से ग्रस्त पाए जाते हैं .

कार्यक्रम के अंत में देश में कार्यरत चतुर्वेदी डॉक्टरों की एक डायरेक्टरी का भी विमोचन किया गया . इस अवसर पर देश भर से आये लोगों ने कार्यक्रम का आनंद उठाया और ज्ञान भी बढाया . कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी ने पालागन डॉट कॉम के संयोजक श्री ज्ञानेंद्र चतुर्वेदी और श्रीमती रचना चतुर्वेदी  की प्रशंसा की. 

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