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Tuesday , 25 April 2017
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याद हैं मुझे

 

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  हैं  मुझे

शिकायत  करती  तुम्हारी  आँखें

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  है  मुझे

माथे  पे  चमकता  वो  चाँद  का  अक्स

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  हैं  मुझ

गुलाबी  गालों  संग  खेलती  काली  लटे

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  है  मुझे

सुर्ख  होंठो  पे  चमकती  शबनम

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  है  मुझे

उम्र  से  लम्बी  जुल्फों  की  दास्ताँ

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  हैं  मुझे

शोर  मचाती  चूडियों  का  संगीत

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  है  मुझे

हथेली  पे  बना  मेहंदी  का  गुलाब

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  है  मुझे

पल-पल  गाती  पायल  का  गीत

भूला  नहीं  हूँ  मैं,  याद  हैं  मुझे

बातों  से  झड़ते  फूलों  की  खुशबू

 

By: Vikas Rishi (विकास  ऋषि)

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