Breaking News

10 घंटों की सर्जरी में निकाले 324 लीपोमास, सर्जन ने बनाया रिकॉर्ड

  • अकले सर्जन ने एक दिन में 324 लीपोमास निकाले
  • डॉक्टर आशीष भनोट की माइक्रो इन्सिजन तकनीक की मदद से हॉलीवुड एक्टर का सफल इलाज

नई दिल्लीहॉलीवुड के जाने-माने एक्टर व मॉडल के लिपोमास (वसायुक्त गांठ) का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। यह पहली बार था, जब किसी सर्जन ने लगातार 10 घंटों तक सर्जरी कर एक दिन में 324 लीपोमास निकाले।

सर्जरी की खास बात यह थी, कि इसमें किसी चीरे या टांकों की आवश्यकता नहीं पड़ी। वहीं, यदि पारंपरिक प्लास्टिक सर्जरी की बात की जाए, तो उसमें पूरे शरीर में लगभग 1300 टांके लगाने पड़ते। डॉक्टर आशीष भनोट की माइक्रो-इन्सिजन तकनीक मल्टिपल लिपोमास का इलाज करती है। इसमें केवल 3 एमएम के माइक्रो इन्सिजन से इलाज पूरा हो जाता है, जिसमें किसी टांके की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ये घाव इतने छोटे होते हैं कि समय के साथ वे खुद ही भर जाते हैं।

मरीज अपने करियर के पीक पर था, कि तभी उसे पूरे शरीर में गांठें महसूस होने लगीं। ये गांठें विशेषरूप से जांघों, पेट के निचले हिस्से, सीने, हाथों और कमर को प्रभावित कर रही थीं। हालांकि, एक्टर के शरीर में कोई दर्द या असहजता नहीं थी, लेकिन उसके जीवन की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब होती जा रही थी। दरअसल, उसे कैमरा फेस करने में समस्या हो रही थी, और दिन-ब-दिन आत्मविश्वास खोता जा रहा था।

कई जगहों पर जांच कराने के बाद मरीज को सर्जरी की सलाह दी गई। सलाह के अनुसार एक्टर ने न्यू यॉर्क में एक प्लास्टिक सर्जन से लिपोमा सर्जरी कराई। समस्या यह थी कि सर्जन एक दिन में केवल 5 लिपोमा निकाल पाया। सर्जरी की प्रक्रिया के चलते मरीज को बड़े-बड़े चीरे लगाए गए, जिसके कारण उसे ठीक होने में लगभग 2 हफ्ते का समय लग गया। दुर्भाग्य से, एक चीरा संक्रमित हो गया, जिसके ठीक होने के बाद वहां कट मार्क्स और टांकों के निशान पड़ गए, जो उसके प्रोफेशन के लिए एक अच्छी बात नहीं थी।

चूंकि, एक्टर के पूरे शरीर में 100 से ऊपर लिपोमास थे, इसलिए उसे इलाज के लिए एक लंबे ब्रेक की आवश्यकता थी। इस समस्या के चलते एक्टर का करियर दांव पर लग गया था। इसके बाद मरीज को डॉक्टर आशीष भनोट की माइक्रो इन्सिजन तकनीक के बारे में जानकारी मिली। जानकारी मिलते ही मरीज ने फोन पर उनकी टीम से बात की और इलाज के लिए ओम क्लिनिक्स पहुंच गया।

नई दिल्ली स्थित ओम क्लिनिक्स के निदेशक, डॉक्टर आशीष भनोट ने बताया कि, “मरीज की जांच करने पर उसके शरीर में 324 लीपोमास की पहचान हुई। मरीज को इलाज की पूरी प्रक्रिया और रिकवरी के समय के बारे में समझाया गया। 324 लिपोमास को एक दिन में निकालना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम था, लेकिन मैंने समय बर्बाद न करते हुए सर्जरी शुरू की। इस पूरी सर्जरी को पूरा होने में 10 से ज्यादा घंटे लगे, लेकिन अच्छी बात यह थी कि मैं सभी गांठों को निकालने में सफल रहा। सर्जरी के बाद तेज रिकवरी के साथ, मरीज को अस्पताल से तीन दिनों में ही डिस्चार्ज कर दिया गया।”

मल्टिपल लीपोमा की पारंपरिक प्लास्टिक सर्जरी में बड़े चीरे और टांके लगाने पड़ते हैं, जिसके कारण व्यक्ति में संक्रमण और दर्द का खतरा रहता है। इस प्रकार की सर्जरी के बाद रिकवरी में बहुत ज्यादा समय लगता है, जिसके कारण न सिर्फ मरीज का समय बर्बाद हुआ बल्कि पैसा भी बर्बाद हुआ। वहीं, माइक्रो इन्सिजन तकनीक की मदद से एक्टर के शरीर में एक भी टांका लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के लिए लगाए गए चीरे इतने छोटे थे कि कुछ ही समय में वे खुद-ब-खुद भर गए।

लीपोमास एक प्रकार के फैटी लंप्स (वसायुक्त गांठे) होते हैं, जो त्वचा और मसल लेयर के बीच में विकसित होते हैं। इन्हें ट्यूमर के नाम से जाना जाता है, जो आमतौर पर कैंसरस नहीं होते हैं। ये सॉफ्ट होते हैं और छूने पर इधर-उधर भागते हैं। यह त्वचा के नीचे होने वाले सबसे आम ट्यूमरों में शामिल है।

डॉक्टर आशीष भनोट ने आगे बताया कि, इस माइक्रो इन्सिजन तकनीक से पहले, इतने सारे लीपोमास को निकालना संभव नहीं था, क्योंकि रुटीन प्लास्टिक या कॉस्मेटिक सर्जरी में जो चीरा लगाया जाता है वह लीपोमास जितना बड़ा होता है। इसके अनुसार यदि एक चीरे पर 4 टांके लगाए जाते, तो 324 चीरों के लिए 1296 टांके लगाने पड़ते, जिससे न सिर्फ मरीज को गंभीर दर्द होता बल्कि उसे लंबे समय के लिए बेड रेस्ट पर रखा जाता। इसके अलावा मरीज को गंभीर संक्रमण होने के साथ शरीर पर घाव के निशान भी पड़ सकते थे।

डॉक्टर आशीष भनोट पहले भी एक दिन में 180 लीपोमास निकाल चुके थे, लेकिन इस मामले के साथ उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। एक मरीज पर 10 घंटे की सर्जरी अपने आप में एक रिकॉर्ड नंबर की तरह है।

About Team | NewsPatrolling

Comments are closed.

Scroll To Top