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Sunday , 20 January 2019
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Ajab Kavita (अजब कविता)

Chandan Rathore Poem No.225
वो सोये तो कविता
वो जागे तो कविता
शब्दों का जनजाल है फिर भी
खो रही थी कविता
 
 
बात ना होती फिर
यादों में थी कविता
हस रहा ये जमाना
और फुट फुट के रो रही कविता
 
 
कविता ना बोले
कविता कई राज खोले
लोगों के खुशियों के माहोल में
झुर झुर रोती है कविता
 
 
कवि की भावना
ना उसका रूप डरावना
फिर क्यों भागे लोग
अकेली ही रह गई है कविता
 
 
पास आओ, मुझे समझाओं
थोड़ा पढ़ो, फिर समझाओं
तुम्हारी ही कहानी हूँ में
अब अपना भी लो तुम कविता
 
भारी भीड़ नही, कुछ ही सही
पर वो भी कविता के इच्छुक हो
तुम भले ही ना पढ़ों
पर ठुकराओ तो ना तुम कविता
By: Rathore Saab

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