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Thursday , 22 August 2019
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Category Archives: Poem

The Monarch

She hopped and swayed like a silly girl Who had just heard the school bell toll. With aplomb, did she take that swirl? In my mind I coxed and cursed her to fall Onto the ground as she flit aloft The dew drops on the glass blades. My heart sank, and yet grew soft For those dried leaves under the ... Read More »

पूछो ना मेरा हाल

तुम  पूछो  ना  मेरा  हाल  मै  ठीक  हूँ तुम  करो  ना  मेरी  परवाह  मै  मस्त  हूँ तुम  भरी  महफ़िल  में  छोड़  के  गई फिर  भी  तेरी  याद  के  साथ  जिन्दा  हूँ तुम  भूल  जाओ  मगर  मै  कैसे  भुलु  तुम्हें तुम  मेरी  रूह-रूह  में  बसी  हो  ये  तुम्हें  क्यों  कहु मै  दीवाना  तू  बेगानी,  मै  परवाना  तू  अंजानी मै  शायर  सही  ... Read More »

तेरे बगैर मै

तेरे  बगैर  मै,  कैसा  लगता  हूँ तेरे  सिवा  मन  मेरा  लगता  नही तेरे  बगैर  सुना  ये  मंझर तेरे  लिए  मै  हूँ  ही  नही कैसे  सम्भालू  अपने  आप  को  ओ  !!  जालिम जब  तेरे  बगैर  पूरा  में  हूँ  ही  नही इतने  गम  सहते  हुए  भी  जिन्दा  हूँ  क्यों तू  क्या  जाने  मेरे  जज्बात  तू  अब  तक  समझी  नही ढूंढ  रहा  हूँ  ... Read More »

आज रो लेने दो

आज  मुझे  रो  लेने  दो आज  मुझे  दुनिया  से  खो  जाने  दो एक  एक  कतरा  आँसुओ  का  मुझे  समेट  तो  लेने  दो आज  इस  दुनिया  की  भीड़  में  मुझे  खो  जाने  दो तेरे  लिये  मेरा  रोना  तेरे  लिये  इन  आँसुओ  का  गिरना अब  चाहे  ख़त्म  हो  जाये  मेरी  ज़िंदगी  के  ये  पल अब  तुझसे  बिछड़  के  है  इतना  रोना आज  ... Read More »

हिंदी भाषी

हिन्द  देश  के  निवासी हम  सब  हिंदी  भाषी  हिंदी  हमारी  पहचान  है  हिंदी  देश  की  शान  है जापान  में  जापानी  है  चीन  में  चीनी  भाषा  है  फिर  भारत  में  ही  हिंदी  क्यों  नही हिंदी  अपनायें देश  बचायें हिंदी  दिवस  की  कोटि  कोटि  बधाईया   By: Rathore saab Read More »

फासले

इन  मिलो  के  फासलों  को  कैसे  कम  करू हो  रही  है  शाम  खुशियों  की  इस  शाम  को  कैसे  खुश  करू ये  सारी  हवाएँ  आती  है  मेरी  ओर मै  किस  किस  हवा  से  सामना  करूदेखता  हूँ  मै  जब  तेरी  सूरत  को चला  जाता  हूँ  मै  मीलों  दूरसूरज  को  पकड़  ना  पाता  हूँ पर  चाँद  से  दूरी  कैसे  कम  करू छोड़  दिया  ... Read More »

Bah Gai Khwahish ( बह गई ख्वाहिश)

उमड़  गये  बादल बरस  गई  बारिश धूल  गए  अरमान बह  गई  ख्वाहिश स्वप्न  की  बेला  में हर  दम  अकेला  में दुःखों  की  सैया  पे खुशियों  की  नुमाइश धिक्कार  सा  जीवन मन  चंचल  सा रोज  नवीन  उत्पात  मचाता नव  मन  क्रीड़ा  की  होती  यहाँ  फरमाइश उछल-उछल  कर  दौड़ता  जाता मन  इक  घोडा  है एक  उपवन  में  ना  समाता मन  शांत  करने  ... Read More »

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