Breaking News

Garib Ka Iman (गरीब का ईमान)

 

Captureआँखे  खोली  बिछड़ा  सब  कुछ
बिना  माँ  और  पा  के  क्या  है  सब  कुछ

दुनियाँ  का  गन्दा  नाला  पीता  रहा
बड़ा  हुआ  कैसे  ये  मुझे  ना  याद  रहा

सीखा  ना  कुछ  भी  ना  शिक्षा  मिली
रोज  मुझे  नीत  नवी  मंजिल  मिली

उदर  पीड़ा  ने  क्या  क्या  सिखाया
मेहनत  ने  तो  मुझे  कई  बार  भूखा  सुलाया

फिर  भी  कांटो  पे  चलता  था
रोज  पानी  सा  रास्ता  बना  के  चलता  था

बेकाबू  सा  मन  था  मेरा
काबू  ना  कर  पाता  था
एक  तो  उदर  पीड़ा  दूसरा  समाज  सताता  था

मै  गरीब  सही  मेरा  ईमान  गरीब  नही  है
मै  भूखा  नंगा  सही  पर  मेरे  ख़्वाब  नग्न  नही  है

चल  रहा  हूँ  उस  रास्ते  पे
चलता  रहूँगा  हमेशा
चाहे  भूख  से  मर  जाऊ
पर  अपना  ईमान  ना  बेचूंगा

 

By: Rathore Saab

 

About Team | NewsPatrolling

Comments are closed.

Scroll To Top