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Thursday , 23 November 2017
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दोहावली भाग 1

Chandan Rathore Poem No.195

साईं  भरोसे  राठौड़  है,  साईं  ही  उसका  पालन  हारा

पुरे  जग  में  है  नाम  साईं  का  ,  फिर  तू  क्यों  फिरे  मारा  मारा    ||  १  ||

गुरु  की  वाणी  बोलिए,  गुरु  करे  सो  ना  कर

एक  दिन  तर  जाएगा,  गुरु  कहे  सो  कर    ||  २  ||

प्रेम  व्यवहार  सब  जूठ  है,  इन  से  मोह  ना  कर

मोह  रखे  सब  तुझसे,  ऐसा  काम  तू  कर  ||  ३  ||

शब्दों  का  तू  तोल  रख,  शब्द  बड़े  अनमोल

बुरे  शब्दों  का  कोई  मोल  नही  ,  अच्छे  शब्द  ही  तू  बोल  ||  ४  ||

बड़े  जो  आये  पहले  तो,  बड़े  ना  कोई  होय

काम  करे  जो  बिन  स्वार्थ  के,  बड़े  वो  जग  में  होय  ||  ५  ||

अच्छी  कला  कलाकार  की,  बुरी  कला  सरकार  की

तूने  जो  पहचान  ली  तो,  फिर  तुझे  फ़िक्र  किस  बात  की  ||  ६  ||

मन  में  उमड़े  भाव  तेरे,  लिखने  मै    तू  दक्ष  होय

हो  रही  वैरागी  दुनिया,  तू  क्यों  उनके  लिए  रोय  ||  ७  ||

मनडी  मटकी  फूटे  गई,  मनडे  में  ना  कोई  समाय

अब  समझ  ले    बात  पते  की,  कुछ  भी  साथ  ना  जाय    ||  ८  ||

मौत  ना  ढूंढे  पाटनर,  मरने  वाला  ना  संग  ले  जाए

जी  कर  कुछ  भी  ना  किया  रे  बंधे,  अब  मौत  में  क्यों  समय  लगाय  ||  ९  ||

बिन  काठी  कट  ना  पायेगी,  बिन  काठ  के  कैसे  तू  मर  पाये

काठ  जले  तो  तू  जले  ,  वार्ना  अध  जला  ही  रह  जाए  ||  १०  ||

Author: Rathore Saab

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