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Thursday , 19 October 2017
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Kyo Bigada Mujhe (क्यों बिगाड़ा मुझे)

Chandan Rathore Poem No.214

ख़ुशी  आज  भी  है
ख़ुशी  कल  भी  रहेगी
मेरी  हर  आदत
तुम  से  कहेगी
“क्यों  बिगाड़ा  मुझे”

हँसी  रहेगी  चेहरे  पर
आँखे  नम  सी  रहेगी
डूब  जायेगे  एक  दिन
साँसे  तुम  से  कहेगी
“क्यों  बिगाड़ा  मुझे”

लब्जो  में  गम  है
इस  दुविधा  में  हम  है
कोई  नही  है  दूर  दूर  तक
फिर  भी  आँखे  तुम  से  कहेगी
“क्यों  बिगाड़ा  मुझे”

तुम  भूल  जाओ  “राठौड़”  को
उसे  अब  जरुरत  नही  तुम्हारी
इतना  सब  कुछ  कर  दिया
अब  क्या  आदत  समझू    तुम्हारी
मेरे  हर  लफ्ज  कहते  है
“क्यों  बिगाड़ा  मुझे”

By: Rathore Saab

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