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Thursday , 14 December 2017
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Natkhat Manva (नठखट मनवा)

Chandan Rathore Poem No.197

 

मन  की  गति  में  दौड़े  जाये  बेला
उछल  कूद  करता  जाए  मनवा  छेला

मनवा  कोयल  सा  गीत  गाये  सुरीला
मन  की  इच्छाओं  की  तीव्र  गति  से  बढ़ती  मधुबेला

वैरागी  सा  मनवा  गुमे  अकेला
कूट  नीतियों  से  भरा  है  मनवा  मेला

मनवा  की  गाथा  गाये  कोकिला
अहम्  ,  अहंकार  से  बहता  मनवा  रेला

लक्ष्मी  देख  मनवा  बनता  खर्चीला
बिन  लक्ष्मी  के  इधर  उधर  भटकता  अलबेला

मनवा  ना  माने  किसी  की,  वो  बहुत  हटीला
अपार  विचारों  को  आग  पे,  जलाता  मनवा  पतीला

थक  कर  मनवा,  जाता  मधुशाला
पी  कर  मधु,खुशियाँ  मनाता  मनवा  अकेला

खुशियों  में  झूमे  मनवा  छेल-छबीला
उछल-कूद  करता  जाए  मनवा  छेला

Author: Rathore Saab

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