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Sunday , 19 November 2017
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Anokhi Preet (अनोखी प्रीत)

Chandan Rathore Poem No.202रीत  अनोखी  प्रीत  सही
मन  का  अनोखा  मित  सही
बिन  कहे  अजुबा  बन  जाऊ
कई  ऐसी  गीत,  संगीत  सही

उमड़-घुमड़  बादल  का  साया
बिन  परछाई  कुछ  समझ  ना  आया
रज-रज  निहारु,  नित  आंसू  पी  जाऊ
आंसू  की  धार  उसकी  संगी  सखी

एक  राज,  राज  सही  देखे  बिन  काज  नही
हम  अकेले  कब  तक  भागेंगे  जब  आप  का  साथ  नही
नजर  भर  देख  लू
भले  वो  मुमताज  नही
रीत  अनोखी  प्रीत  सही
मन  का  अनोखा  मित  सही

काले  कोयल  सा  मन  लिए  फिरू
सपनो  की  गढ़री  मन  में  धरु
मन  के  काले  पन  को  में  पी  जाऊ
भले  ही  उसमे  मेरी  मौत  सही
रीत  अनोखी  प्रीत  सही
मन  का  अनोखा  मित  सही

 

By: Rathore Saab

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