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Wednesday , 17 October 2018
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मेरी गुमनाम आशिक़ी

Chandan Rathore Poem No.172
मेरी  धड़कन  की  आवाज
आज  सुने  मेरे  अल्फाज
जाने  क्या  सह  रहा  हूँ
जाने  क्या  सोच  रहा  हूँ
 
धड़कन  में  हल-चल  सी  है
उठ  रहा  कोई  उबाल  सा  है
शांत  हो  जायेगी  धड़कन  मेरी
हर  बार  आते  ऐसे  विचार  है
 
पुकार  रहा  किसी  बेवफा  को
रोती  धड़कन  उसकी  वफ़ा  को
चलता  है  फिर  रुक  जाता  है
पता  नही  याद  कर  रहा  है  किसी  को
 
आरजुये    समेटी  नही  जाती
वो  लड़की  भुलाई  नही  जाती
उसके  अलावा  मुझे  किसी  की  याद  ना  आती
उसके  सामने  मेरी  जिंदगी  भी  शर्माती
 
लिख  रहा  हूँ    अपने    झज्बातो  से
शुरू  होती  मेरी  शुबह  उसी  की  यादो  से
बह  रहे  है  जिंदगी  के  सारे  पहलु
अब  क्या  आशा  रखु  मुर्दा  झज्बातो  से
 
By: Rathore Saab
 

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