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Monday , 17 December 2018
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इन्द्रधनुष के रंग सजाने तो दो

तुफानों  से  आँख  मिलाने  तो  दो  I
गमे  दरिया  पार  हो  जाने  तो  दो  I
फिर  करेंगे  बयां  हकीकत  तुम्हे,
पहले  कोई  कहानी  बनाने  तो  दो  II

संभलने  को  कहते  हो  तुम  सदा,
पहले  हमें  ये  होश  गवाने  तो  दो  I
शाखों  से  पत्तियां  तोड़  लूँ  कैसे,
गुलशन  में  बहार  आने  तो  दो  II

हुस्न  को  ज़रा  घबराने  तो  दो  I
सुरूर  ए  मोहब्बत  छाने  तो  दो  I
दीदार  की  तमन्ना  भी  होगी  पूरी,
रुख  से  ज़रा  नकाब  हटाने  तो  दो  II

बादल  को  झूम  कर  आने  तो  दो  I
चाँद  को  भी  जरा  शर्माने  तो  दो  I
तुम्हारा  दर्द  महसूस  कैसे  करूँ,
अंगारों  में  हाथ  जलाने  तो  दो  II

छीन  लेना  हंसी  लबों  से  मेरे,
पहले  मुझे  मुस्कुराने  तो  दो  I
सुकूं  मिलेगा  त़ा  उम्र  तुम्हे,
बड़ों  का  आशीर्वाद  पाने  तो  दो  II

जाम  से  जाम  टकराने  तो  दो  I
महफ़िल  में  रंग  जमाने  तो  दो  I
नए  भी  बन  जायेंगे  दोस्त  मगर,
रूठों  को  पहले  मनाने  तो  दो  II

बनेगी  नई  सरकार  नेताजी  पर,
जनता  को  भरोसा  दिलाने  तो  दो  I
वर्ना  कह  दोगे  फिर  बेवफा  हमें,
जो  किये  हैं  वादे  निभाने  तो  दो  II

कैसे  मान  लूँ  उन्हें  बैरी  मैं  अपना,
दोस्तों  को  खंजर  उठाने  तो  दो  I
असली  चेहरा  आएगा  सामने,
चेहेरे  से  मुखौटा  हटाने  तो  दो  II

कागज़  की  नाव  चलाने  तो  दो  I
अंखियों  में  घर  बसाने  तो  दो  I
भरोसा  तो  करो  जरा  माझी  पर,
भंवर  से  उसे  बचाने  तो  दो  II

यह  दुनिया  बड़ी  ही  खूबसूरत  है,
इन्द्रधनुष  के  रंग  सजाने  तो  दो  I
कृष्ण  भी  है  देखो  कितने  आतुर,
सुदामा  को  मिलने  आने  तो  दो  II

Poet: Gurchan Mehta

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