Follow my blog with Bloglovin
Saturday , 19 August 2017
Breaking News

दंगल या पब्लिसिटी स्टंट – मन में उमड़ते प्रश्न बाबा रामदेव के लिए

Baba Ramdev shows Andrey Stadnik flipside@PWL2

मैंने बचपन में कुश्ती और दंगल बहुत देखे हैं, पर ऐसा न कभी देखा न सुना। जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ हमारे परम पूजनीय बाबा रामदेव जी और २००८ में समर ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले ऐंद्रिय स्तादनिक के बीच हुए एक प्रमोशनल कुश्ती युद्ध की। यह कुश्ती(दंगल) बीते बुधवार को नयी दिल्ली में पतंजलि पॉवरवीटा प्रो रेसलिंग लीग (पी डब्लू एल ) में एक विज्ञापन प्रचार के तौर पर हुआ।
इस खबर को हाथों हाथ बहुत से बड़े बड़े न्यूज़ चैनल्स ने प्रकाशित किया। सबको खबर सुनकर बहुत अच्छा लगा की एक योग करने वाले साधू ने एक मेडलिस्ट को कुश्ती में पराजित कर दिया। पर क्या ये सच है ? सच मैं बाबा जी ने ऐंद्रिय स्तादनिक को कुश्ती में हरा दिया?
मुझे कुश्ती देखकर यह प्रतीत तो नहीं हुआ कि ऐंद्रिय स्तादनिक बाबा रामदेव से कुश्ती करने के मन में थे। उन्होंने या तो उनको बुजुर्ग समझकर कुश्ती कि और हार गए, या फिर उनके बीच कुछ ऐसा तय हुआ जिसमे हारने वाले का भी फायदा और जीतने वाले का भी।
मैं बाबा रामदेव से पूछना चाहती हूँ की अगर वह इतने ही अच्छे से कुश्ती कर सकते हैं तो भारत के लिए ओलिंपिक में गोल्ड मेडल लाने का ज़िम्मा वह खुद ही क्यूँ नहीं उठाते। खुद प्रतिभागी के तौर पर भाग नहीं ले सकते तो वह एक ऐसे अच्छे ट्रेनर तो बन ही सकते हैं, जो भारत के प्रतिभागियों को अच्छे से योग करा कर और पतंजलि पावरविटा पिलाकर मेडल दिला सके। वैसे भी बाबा जी ने भारत को फिर से सोने कि चिड़ियां बनाने का सपना देखा है।
क्या वह ऐसा सोचते हैं कि वह एक योगी हैं, और उनका काम सिर्फ योग साधना तक ही सीमित है। यदि ऐसा है तो फिर कल उन्होंने ये कुश्ती क्यूँ की। बाबा जी कुश्ती से योग का विज्ञापन करना चाहते थे या फिर पतंजलि के उत्पादों का, यह तो हमें बाबा जी ही बता सकते हैं।
अभी हाल ही में बैंगलोर में नव वर्ष के हर्ष उल्लास भरे माहौल में सामूहिक तौर पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ हुयी और उसे सरकार ने मीडिया ने ऐसे ही आयी गयी बात समझकर छोड़ दिया और भूल गए। मैं बाबा जी से प्रश्न करना चाहती हूँ कि क्या इसके लिए कोई प्रमोशनल शो नहीं कर सकते, जिसमें वह लड़कियों और महिलाओं को उनकी सुरक्षा के लिए काम आने वाले कुश्ती के टिप्स दें, जिससे हमारे दकियानूसी समाज के दलालों को भी जबाब मिले।
मैं जानना चाहती हूँ कि,क्या इससे योग के प्रति जागरूकता कम हो जाएगी या पतंजलि के उत्पादों का बिकना कम हो जायेगा। अगर हाँ तो फिर हम आज उस भारत में रह रहे हैं जहां कि सरकार से लेकर साधू तक सब व्यापारी और दलाल हैं, जो सिर्फअपने फायदे के बारे मैं सोचते हैं।
    मैं यहाँ न तो बाबा जी का अपमान कर रहा हूँ और न ही योग और पतंजलि के उत्पादों का। यह बस मेरे मन में प्रश्नों का उमड़ता मंजर है जिसे उत्तर मिलने कि दरकार है।

Comments are closed.

Scroll To Top
badge