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Monday , 25 September 2017
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MERI PEEDA (मेरी पीड़ा)

Captureमेरी  आँखें  भोली  भाली
गहरी  नीली  काली  काली

देख  संसार  की  काला  बाजारी
आँखें  रोती  बारी  बारी

प्रेम  वियोग  से  तो  मन  रोते  है 
आँखें  रो  रो  कर  हो  गई  भारी

बिना  स्वार्थ  जिया  मै  करता 
कौन  सहे  दुःख  बारी  बारी

तुम  हो  मेरे  आँखों  के  तारे 
कहत  माँ  सो  गई  दुखियारी  प्यारी

शब्द  बने  साखी  संगी 
कागज  रोये  साथ  में  मेरे 
कलम  रोये  स्याही  की  बोली
एक  एक  आँशु  आये  भारी  भारी

मन  चंचल  शीत  लहर  सा 
सिकुड़  कर  बैठा  है  मस्त  अँधेरे  में 
लिख  लिख  कर  सुना  रहा  है  “राठौड़” 
अपनी  मन  की  पीड़ा  बारी  बारी

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