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Tuesday , 23 October 2018
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Naa Pucho Is Diwane Se ( ना पूछो इस दिवाने से )

तन्हाई  के  मंझर  पर  गुझर  रहे  हो  आप
Chandan Rathore Poem No.192तनहा  खुद  होकर  भी  हमसे  पूछ  रहे  हो  आप

हम  क्या  बताये  आप  की  तन्हाई  का  मंझर
सब  कुछ  पास  होके  भी  मेरे  दिल  है  बंझर

तुम्हारे  सवालों  के  जवाब  आज  भी  मिलते  नही
बता  तो  सब  दे  पर  ये  दिल  गवा  देता  नही

ना  पूछो  अब  इन  हवाओं  से  की  हम  आज  भी  तुम्हारे  है
ना  पूछो  इस  ज़माने  से  की  आज  भी  मेरे  सपने  तुम्हारे  है

ना  पूछो  इस  महखाने  से  की  रोज  शाम  को  ये  सजती  क्यों  है
ना  पूछो  उस  जलती  हुई  समा  से  की  वो  आज  भी  जलती  क्यों  है

अगर  पूछे  वो  किसी  से  भी  तो
कुछ  ना  कहना,  चाहे  मेरी  जान  जाए
अगर  किसी  ने  कुछ  भी  कह  दिया  तो
उनके  आँखों  में  आशुँ  ना  आ  जाए

तनहा  नही  होते  ऎसे  रूठा  नही  करते
मेरे  दिल  का  हाल  भी  ऐसा  ही  है  बस
ना  पूछो  इस  दिवाने  से
ना  पूछो  इस  दिवाने  से

By: Rathore Saab

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