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Monday , 18 December 2017
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मेरा नया ठिकाना

जिन्दगी  की  कसमकस  से  दूर  एक  सैया  पे  सोये  हें  |

एक  तरफ  घी  का  दीपक  दूसरी  और  कूल  का  दीपक

रो  रो  कर  अपने  अपनों  को  बुला  रहे  हे  दोस्तों  ||1||

जो  था  मन  में  वो  सब  रो  रो  के  सुना  रहे  हे  |

जब  में  था  तो  कोई  मेरा  ना  था

आज  सब  चिल्ला  चिल्ला  कर  अपना  बता  रहे  हे  दोस्तों  ||2||

जब  था  तो  कदर  ना  थी  मेरी  आज  सिने  से  लगा  कर  रो  रहे  हे  लोग  |

जिन्दा  था  तो  किसी  ने  पानी  का  नही  पूछा

आज  मेरी  लाश  के  पास  से  चीटिया  हटा  रहे  हे  लोग  ||3||

दिन  ढला  रात  हुई  फिर  नया  सवेरा  था

जो  बाकि  थे  वो  भी  आ  रहे  थे  लोग  |

सब  अपना  अपना  राग  सुना  रहे  थे  लोग  ||4||

जिन्दा  था  तो  नहाने  का  पानी  नसीब  नही  था  |

आज  गंगा  जल  ,  दुध  और  गव  मूत्र  से  नहला  रहे  हे  लोग  ||5||

हुआ  समय  मेरे  अपने  घर  को  छोड़ने  का  |

आ  गया  गास  फूस  का  बिस्तर  उसपे  मुझे  लेटा  रहे  हे  लोग  ||6||

भाग  ना  जाए  मेरी  काया  इसलिए  उसे  भी  रस्सी  से  बाँध  रहे  हे  लोग  ||7||

हुआ  जब  समय  विदाई  का  तो  आलम  ही  कुछ  अजीब  था  |

जिन्दा  था  तो  लोगो  ने  ठोखरो  (पेरो)  में  निकला

आज  मेरे  पेरो  को  पकड़  कर  रो  रहे  हे  लोग  ||8||

उठाया  मुझे  इस  कदर  जेसे  मनो  में  आश्मान  में  झूल  रहा  हु  |

जिनको  में  अपने  कंधो  पर  उठाता  रहा

आज  मुझे  कंधो  पर  उठा  कर  शमशान  की  और  ले  जा  रहे  हे  लोग  ||  9  ||

चल  पड़ी  मेरी  काया  उसी  रास्ते  जिस  रास्ते  निकलता  में  रोज  |

आखे  नम  मेरे  साथियों  की  और  नमन  कर  रहे  थे  लोग  ||  10  ||

कुछ  ही  दूर  था  मेरा  नया  ठिकाना

जिसे  मेने  अब  तक  ना  पहचाना

तुम  याद  जरुर  रखना

एक  दिन  तुम्हे  भी  यही  हें  आना  ||  11  ||

राम  नाम  सत्य  हें  राम  नाम  सत्य  हें

ये  कहते  हुए  ले  गये  मुझे  दोस्तों  |

राम  नाम  सत्य  हें  ये  आज  मुझे  समझा  रहे  हें  लोग  ||  12  ||

आ  पंहुचा  में  उस  मंजर  पर

जिस  पर  पहुचने  के  लिए  मुझे  बरसो  लगे  |

आज  मिट  जायेगा  मेरा  हर  एक  सपना

पराया  हो  जायेगा  मेरा  ठिकाना  दोस्तों  ||  13  ||

लेटा  दिया  मुझे  लकडियो  के  बिस्तर  पर  |

चारो  तरफ  लोग  ही  लोग  मेरे  बिस्तर  को  सजाने  में  लगे  थे  दोस्तों  ||  14  ||

मेरे  शरीर  के  बारे  में  ऐसी  बाते  कर  रहे  थे

मानो  किसी  जानवर  के  शरीर  को  जला  रहे  थे  लोग  ||  15  ||

वे  ही  थे  वो  लोग  जिन्हें  में  अपना  समझता  रहा  |

आज  मुझे  ज्ञात  हुआ  सब  मोह  माया  हें

प्रभु  की  सेवा  ही  अपनी  माया  हें  दोस्तों  ||  16  ||

जिन्दा  था  तो  बेटो  ने  घी  नसीब  ना  कराया  दोस्तों  |

बेटे  आज  घी  शरीर  पर  लगा  रहे  हें  दोस्तों  ||  17  ||

जो  था  मेरे  पास  वो  सब  ले  लिया

हाथ  में  बंधा  धागा  भी  मेरा  ना  हुआ  दोस्तों  ||  18  ||

सब  कहने  लगे  देख  लेना  कही  कुछ  रह  ना  जाये  इनके  शरीर  पर  |

जिन्दगी  भर  कमाया  था  कुछ  साथ  नही  गया  दोस्तों  ||  19  ||

आ  गया  मेरा  बेटा  हाथ  में  जलती  हुई  लकड़ी  लिए  |

पाला-पोषा  काबिल  बनाया  आज  वो  ही  जला  रहा  हें  दोस्तों  ||  20  ||

जला  दिया  मेरे  शरीर  को  शुरू  हुआ  काम  मेरी  अश्तियो  को  ठिकाने  लगाने  का  |

कुछ  तो  निकाली  हरिद्वार  पहुचाने  के  लिए  बाकि  बहा  दी  नदी  में  दोस्तों  ||  21  ||

चले  गये  सब  अपने  अपने  आशियाने  में

भूल  गये  सब  मुझे  याद  रही  मेरी  बाते  दोस्तों  ||  22  ||

माना  वो  दस्तूर  था  दुनिया  का  पर  |

जो  आज  मेरे  साथ  हुआ  वो  कल  तुम्हारे  साथ  भी  होगा  दोस्तों  ||  23  ||

छोड़ो  सब  झगडा  हिल  मिल  रहो  सब  साथ  दोस्तों  |

साथ  ना  कुछ  गया  ना  कुछ  जाएगा  बस  रह  जाएगी  यादे  दोस्तों  बस  रह  जाएगी  यादे  दोस्तों  ||  24

 

 

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