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Monday , 25 September 2017
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Tere Bin (तेरे बिन)

Chandan Rathore Poem No.199

कही  तो  होगी  वो  नूरानी
बस  होके  प्रेम  दीवानी
मदहोश  होके  राहों  पे  मेरी
गुम  हो  जायेगी  उसकी  इश्क़  की  खुमारी

बिन  उसके  बरसते  नही  ये  बादल
बिन  उसके  रंग  नही  है  सावन  में
बिन  उसके  खुशबु  नही  है  फूलों  में
अब  तो  आ  जाओं  मेरी  उल्जी  हुई  पहेली
तुम्हे  सुलजाने  को  भी  कम  है  ये  जिंदगानी

ऐतबार  नही  इस  दुनिया  से  बिना  तेरे  सिवा
तू  ख़्वाब  ना  बन  जाए  बस  अकेला  हूँ  तेरे  सिवा
मधु  के  जैसे  मीठी  बोली  तुम्हारी
बड़ी  सिद्दत  से  पालु  जुदाई  तुम्हारी

इतबार  क्यों  करती  हो  मुझसे  बोलो  तो  सही
बिन  तेरे  ये  आस्की,ये  इश्क़,  क्या  बताओं  तो  सही
अब  क्या  क्या  रो  रो  कर  बताऊँ    तुम्हें
तुम्हारे  बिन  ये  जिंदगी  सुनी  सुनी  ही  सही

Author: Rathore Saab

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