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Saturday , 24 August 2019
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अपनी तरकीब को भी आजमा लें

आपने एक लोकप्रिय विज्ञापन के कथन को अवश्य सुन रखा होगा, एक आइडिया जो जिंदगी बदल दे. कुछ महान वैज्ञानिकों के प्रत्यक्ष ज्ञान ने साधारण घटनाओं को कुछ महान सिद्धांतों में सूत्रबद्ध कर मानव सभ्यता की दिशा बदल दी.

एक सेब का गिरना खाद्य पदार्थ की आसान उपलब्धता हो सकता है, लेकिन न्यूटन के शक्तिशाली मस्तिष्क ने इसे भौतिकशास्त्र में महान सिद्धांतों का द्वार खोल दिया. सफलता का रहस्य मनुष्यों के विचारों के अंदर निहित होता है. एक आइडिया या विचार व्यक्ति को सफल या असफल बना सकती है. एक आइडिया आप की जिंदगी कैसे बदल देगा, आइए जानें प्रख्यात सक्सेस गुुरु ए के मिश्रा से.
 
हमारी सोच सभी सफलताओं, समस्त सांसारिक प्राप्तियों, सभी महान खोजों एवं आविष्कारों तथा समस्त उपलब्धियों का मौलिक स्रोत होती है. हमारे विचार हमारे चरित्र, हमारे करियर और वास्तव में हमारे दैनंदिन जीवन का निर्धारक होते हैं. विचार सभी कार्यों के पीछे के मार्गनिर्देशक बल होते हैं और हमारे कार्य अनजाने में हमें सफलता या असफलता की ओर ले जाते हैं. यह सच ही कहा गया है कि विचार मनुष्य को बना देते हैं या तोड़ देते हैं.
 
आइडिया अर्थात् विचार हमारे सोचने की प्रक्रिया से संबंधित होती है. सोचने की प्रक्रिया और जीवन के अनुभव हमारी स्मृति का निर्माण करते हैं, जो मानव साफ्टवेयर की भांति कार्य करती है. जो हमारे साथ घटित होता है वह हमारा अनुभव नहीं होता, बल्कि हम उन घटनाओं के साथ क्या करते हैं वे हमारे अनुभव कहलाते हैं. दूसरे शब्दों में, हमारे अनुभव हमारे जीवन की विविध घटनाओं द्वारा सृजित उद्यीपनों के प्रति हमारी प्रतिक्रियाएं हैं. आने वाली घटनाओं के प्रति हमारी प्रतिक्रियाएं समान अवस्थाओं में हमारे अतीत के अनुभवों पर आधारित होते हैं. हमारे सोचने का तरीका हमारी स्मृति के सृजन और हमारी मनोवृत्ति को प्रभावित करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.
 
वास्तव में, सोच स्मृति का सृजन करती है और स्मृति मनोवृत्ति का निर्माण करती है, जो
अंतत: सफलता अथवा जीवन की ऊंचाई को निर्धारित करती है. वस्तुत: सोच मानव स्मृति के सृजन की प्रक्रिया है. हम जो कुछ भी हैं, वह अब तक की हमारी सोच का परिणाम है. प्रत्येक शब्द जिसे हम सोचते हैं, वे हमारे जीवन का निर्माण करते हैं. हमारा जीवन हमारी सोच और सोच प्रक्रिया का परिणाम है. सफलता का रहस्य मनुष्यों के विचारों के अंदर निहित होता है. विचार कमजोर व्यक्ति को मजबूत और मजबूत व्यक्ति को और मजबूत बनाते हैं. हमारे समस्त क्रियाकलाप, यथा-खाना, कपड़े पहनना, वाहन चलाना, खेलना आदि सभी हमारे विचार से प्रारंभ होते हैं. हमारे चलने, बोलने, पहनावे और स्वयं की प्रस्तुति के तरीके से हमारे सोचने का तरीका प्रतिबिंत होता है. हम जो कुछ अंदर होते हैं, वही बाहर प्रदर्शित करते हैं.
हम अपने नए विचार के उत्पाद होते हैं, हम जो कुछ बनने का विश्वास करते हैं हम वही बनते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो जैसी हमारी सोच होगी, वैसे ही हमारे कार्य होंगे और जैसे हमारे कार्य होंगेे, वैसी ही सफलता हमारे हाथ लगेगी.
 
महान धर्म गुरुओं द्वारा यह विश्वास किया जाता है कि यह ब्रह्मांड, ब्रह्मांडीय मस्तिष्क की सोच द्वारा सृजित किया गया है. यह ब्रह्मांडीय मस्तिष्क सूचनाओं का महा राजपथ है, जो सभी मानव मस्तिष्कों को एक साथ जोड़ता है. यही कारण है कि हम एक दूसरे के विचारों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, भले ही हम शरीर संपर्क में न हों. हम उसे अंतज्र्ञान या छठीय ज्ञानेंद्रीय कहते हैं. हम बहुत हद तक दूसरों द्वारा समाचार पत्र, चलचित्र, रेडियो और आकस्मिक भेंट मुलाकातों के दौरान एक छोटे से विचार के माध्यम से भी एक अलग ढांचे में ढ़ाल दिए जाते हैं. हमारे ऊपर हर समय लगातार विभिन्न डिग्री के विचारों की बमबारी होती रहती है. इनमें से कु छ हमारे अंदर की आवाज के साथ मेल खा सकते हैं और महान दृष्टि प्रदान कर सकते हैं.
 
BY: ए के मिश्रा निदेशक चाणक्य आई ए एस एकेडमी नई दिल्ली

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