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चूड़ियाँ (Chudiya)

तप-तप  कर  बन  जाती  है  कांच  की  चूड़ियाँ बचती  बचाती  बाजार  में  पहुंच  जाती  है  चूड़ियाँ आते  खरीदार  पसंद  करते  है फिर  ठुकराते  है  चूड़ियाँ लाल  हरी  नीली  पीली  कई  रंगो  में  होती  है कई  टुट  के  गिर  जाती  है और  कई  हाथों  में  सज  जाती  है  चूड़ियाँ जब  बोलती  है  तो  किसी  को  बुलाती  है  चूड़ियाँ जब  दो  पंछियों  ... Read More »

वैराग्य

सब  छोड़  मुसाफिर  अपना  ले  वैराग्य घर,  रिश्ते,  समाज  और  अपनों  को  ना  त्याग दान  कर  ले  विचार  सब,  विचार  में  ले  वैराग्य बैठ  जा  अब  तो  रे  प्राणी,  ना  दौड़-भाग भाग-भाग  कब  तक  भागेगा करने  कलेवा  पीछे  तेरे,भाग  रहे  यमराज संसार  की  हर  वस्तु  भय  देगी,  नीडर  है  वैराग्य शांत  कर  अपने  मन  को बस  कर  ले  वैराग्य  अपने  ... Read More »

खामोश अल्फाज

शब्दों  के  आश्मान  से  शब्द  लिए  जा    रहा  हूँ सफ़ेद  कफ़न  पे  मेरे  आँशु  लिखे  जा  रहा  हूँ फिर  भी  चढ़ा  नही  ये  कफ़न  आज  तक  किसी  लाश  पर लेकर  फिरता    हूँ  गली-गली,  कभी  कोई  आश  नही  कभी  अच्छा  अहसास  नही मन  गमगीन  हुआ  फिरता  है,  विचारों  की  कोई  शाम  नही आशा  निराशा  की  फ़िक्र  नही  हँसी-ख़ुशी  का  जिक्र  नही ... Read More »

मेरी गुमनाम आशिक़ी

मेरी  धड़कन  की  आवाज आज  सुने  मेरे  अल्फाज जाने  क्या  सह  रहा  हूँ जाने  क्या  सोच  रहा  हूँ   धड़कन  में  हल-चल  सी  है उठ  रहा  कोई  उबाल  सा  है शांत  हो  जायेगी  धड़कन  मेरी हर  बार  आते  ऐसे  विचार  है   पुकार  रहा  किसी  बेवफा  को रोती  धड़कन  उसकी  वफ़ा  को चलता  है  फिर  रुक  जाता  है पता  नही  ... Read More »

मेरा सपना

  सब  गम  अपना  सबको  खुश  रखना    नही  चाहिये  माया  साथ  रहे  नाम  कमाया   रहे  बुजुर्गों  का  साया  मिले  एक  पेड़  की  छाया    सुकून  से  भरा  रास्ता  हो  मेरी  भगवान  मे  आस्था    मेरे  जैसे  हजारों  लिखने  वाले  बनाऊ  सब  रहे  यहाँ  और  मै  कही  गुम  हो  जाऊ    रो  रो  कर  सारी  थकान  उतार  दूँ  मै  ... Read More »

हमारी रोबो

  गुरुर  उसका  शरीर मेला  -कुचैला    सा  नीर   गमण्ड  उसका  श्रृंगार  सोच  उसकी  सरकार    अपनी  ही  वो  हर  दम  चलाती   खुद  काम  गलत  कर  मुझ  पर    चिल्लाती   सोच  उसकी  बहुत  विशाल  पर  रखती  ना  खुद  का  ख्याल   गुरुर  इतना  वो  करती जैसे  पूरा  जहाँ  उसकी  मुट्ठी    में  करती   अब  तो  वो  गमण्ड  में  है  ... Read More »

I Saw My Angel

Morning of June 18th 1991 was very special to me as I woke up with a dream of my Dadu (Paternal Grand Father) waving me goodbye. We had just returned to Pune from his place, Giridih, the previous evening accomplishing a mammoth journey of three days and two nights. Mom deciphered that my dream implied, I had been missing him. I ... Read More »

The Monarch

She hopped and swayed like a silly girl Who had just heard the school bell toll. With aplomb, did she take that swirl? In my mind I coxed and cursed her to fall Onto the ground as she flit aloft The dew drops on the glass blades. My heart sank, and yet grew soft For those dried leaves under the ... Read More »

बाअदब आँखों में गौहर छुपाए रखता हूँ

बाअदब  आँखों  में  गौहर  छुपाए  रखता  हूँ लबों  पर  अपने  तबस्सुम  सजाए  रखता  हूँ  . मुक़म्मल  आराम  चाहती  हैं  थकी  पलकें आख़िरी  दिन  लिए  नींद  बचाए  रखता  हूँ. कोई  तन्हा  छोड़  गया  था  मुझ  दीवाने  को उसी  मोड़  पर  मैं  आँखे  बिछाए  रखता  हूँ. चराग़  रौशन  रखने  हों  जब  देर  तलक एहतियातन  दूर  उनसे  हवाएँ  रखता  हूँ. बनानेवाले  ने  कैसे-कैसे  ... Read More »

साँसे तो चलती रही

साँसे  तो  चलती  रही  पर  कुछ  रुका-रुका  रहा जाने  क्या  बात  हुई  कि  दिल  ख़फ़ा-ख़फ़ा  रहा. जाते-जाते,  जो  सितारा  माथे  पे  सजाया  तूने, वो  चमकता  तो  रहा,  पर  कुछ  बुझा-बुझा  रहा. मौसम  देखे  हैं  मैंने,  बड़े  मुख़्तलिफ़  बारहा, आज  शाम  का  आलम  बेहद  जुदा-जुदा  रहा. जिसे  उंगली  पकड़  के  चलना  सिखाया  ‘रंजन, वही  बेटा  बड़ा  होकर,  हमसे  कटा-कटा  रहा. सर  ... Read More »

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