Breaking News

Jindgi Raas Naa Aai ( जिंदगी रास ना आई )

Chandan Rathore Poem No.178मन  की  मती  कहा  ले  आई
मुझको  मेरी  जिंदगी    रास  ना  आई

शब्दों  के  जंजाल  में  हूँ  कही
एक  भी  लहर  एक  सांस  में  ना  आई

रूबरू  हुआ  जख्मों  से  हर  दम
मुझे  किसी  भी  पल  ख़ुशी  ना  आई

एक  चाँद  को  देखता  था  मै  अकेले  बैठ  कर
पर  उसे  भी  मेरी  निहारने  की  अदा  ना  भाइ

आहट  आती  है  कई  की  सम्भालो  राठौड़
पर  राठौड़  की  मती  में  वो  बात  ना  आई

घिस  रहा  चन्दन  मंदिर  में
जल  रहा  चन्दन  समशानो  में
अब  तक  उसकी  मंजिल  ना  आई

रूठ  कर  बैठ  गया  खुशियों  के  मेह्खानों  में
एक  ख़ुशी  नही  संग  आई

मन  की  मती  कहा  ले  आई
मुझको  मेरी  जिंदगी    रास  ना  आई

 

By: Rathore Saab

About Team | NewsPatrolling

Comments are closed.

Scroll To Top