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अँधेरा (BLACK)

Chandan Rathore Poem No.196बेकसूर  सा  रंग
कई  उसमे  उमंग
अँधेरे  के  संग
खुद  में  मलंग

काल  का  काला  रंग
मिलों  लम्बी  सुरंग
बिना  सुर  का  सारंग
गुमनाम  सा  स्वर्ग

इठलाता  हुआ  स्वांग
नशे  से  लुप्त  भांग
जीत  की  हजारों  तरंग
जिंदगी  उसके  बिना  बेरंग

जीवन  पे  दाग
उजाले  का  सुहाग
काले  रंग  पे  बेदाग़
अँधेरे  में  लगी  जैसे  आग

मुश्किलों  में  मुश्किल
सवालों  में  सजकता
अपने  अंतर्मन  में
जलता  हुआ  चिराग

 

बस  ये  ही  है  अँधेरे  की  कहानी
अँधेरा  जीवन  की  मनमानी
बंद  आँखों  में  फिर  नई  सोच
उछल-उछल  कर  दुनिया  की  खोज

बस  मौत  नही  जीवन  सही
अँधेरे    की  खोज  उजाला  है
वो  उस  से  मिला  नही
एक  एक  कतरा  कतरा  है
अँधेरा  बस  अँधेरा  है
अँधेरा  बस  अँधेरा  है

 

Author : Rathore Saab

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