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Jindgi na sambhalti he ( जिंदगी ना संभलती है )

Chandan Rathore Poem No.177ना  गुजरती  है  ना  कटती  है
ऐ!  खुदा  तेरी  जिंदगी  अब  मुझसे  ना  संभलती  है

ना  मिलती  है  ना  बिकती  है
ना  हँसती  है  ना  रोती  है
मंजिल  तक  ना  पहुँचती  है
ना  रूकती  है
ऐ  खुदा  ले  ले  तेरी  जिंदगी  अब  मुझसे  ना  संभलती  है

ना  चुप  रहती  है  ना  मचलती    है
ऐ  खुदा  तेरी  ये  दी  हुई  जिंदगी  मुझसे  ना  संभलती  है

ना  ये  डूबती  है  ना  ये  तैरती  है
ना  ये  सोती  है  ना  ये  जागती  है
ऐ  खुदा  तेरी  ये  जिंदगी  मुझसे  ना  संभलती  है

जिंदगी  के  दिये  गुमनाम  दर्द
मोैत  से  बड़ा  ना  कोई  हमदर्द
ऐ  खुदा  मेरी  मोैत  मुझसे  ना  संभलती  है
ऐ  खुदा  मेरी  मोैत  मुझसे  ना  संभलती  है

 

By : Rathore Saab

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