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Tu Kar Ibadat ( तू कर इबादत )

Chandan Rathore Poem No.180तू  कर  इबादत  मेरी  लाश  को  कुत्ते  खाए
लगा  कर  मुँह  पे  खून  मेरा  वो  तेरे  पास  आये

तू  कर  आज  इबादत  मेरी  अर्थी  जल्द  ही  सज  जाए
नुरे  नजर  इतेफाक  से  तेरा  निकाह  उसी  दिन  हो  जाए

तू  कर  तेरे  आका  से  रहमते  तेरी  रूह  की
मै  करू  सजका  अल्लाह  का  और  मेरी  रूह  भी  तेरी  हो  जाए

तू  कलमा  पढ़े  तेरे  शौहर  का  की  उससे  कोई  गुनाह  ना  हो  जाए
मेरी  दुवा  अगर  उससे  कोई  गुनाह  हो  तो  सजा-ऐ-मोैत  मुझे  आ  जाए

मुहोबत-ऐ-सुकून  की  मांगी  थी  मुराद  मेने
तुमने  मेरी  जोली  में  रख  दी  नूरानी  जायदात

तू  कर  इबादत  की  अगली  सांस  ना  लू  मै
अगर  लू  तो  बस  तेरा  ही  नाम  मेरे  लबो  पे  आये

इश्क़  प्यार  तो  रब  की  जायदात  है
तू  कर  इबादत  मेरी  लाश  को  भी  प्यार  ना  मिले
या  रब  उसकी  सुनना  मरने  से  पहले  ही  सारे  जज्बात  मुझे  मिल  जाए

तू  कर  इबादत  मुझे  कब्र  की  भी  जगह  ना  मिले
मान  जाए  खुदा  तेरी  दुवा  तो  तेरे  साथ  कब्र  भी  मिल  जाए

तू  कर  आज  इबादत  की  मै  खुशियों  के  लिए  रोऊ
सुन  ले  खुदा  तो  हम  तुम्हारे  दामन  में  फुट-फुट  के  आँसू  बहायें

तू  कर  ले  लाख  कोशिस  खुदा  को  मनाने  की
मान  जाए  वो  खुदा  तो  मुझे  मोैत  आ  जाये

होश  नही  है  मुझको  की  क्या  लिखा  और  क्या  पढ़  रहा  हूँ  मै
बस  तू  इबादत  कर  मोला  से  ……
बस  तू  इबादत  कर  मोला  से  ……

 

Poet: Rathore Sahab ( राठौड़ साब “वैराग्य” )

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