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Naa Koi Khuwaish (ना कोई खवाइश)

Chandan Rathore Poem No.226

ना  मन  उदास  है  ना  मन  में  ख़ुशी
आज  फिर  लोगों  ने  दे  दी  मुझे  जूठी  हसीं

अब  क्या  रहा  जीवन  और  क्या  रही  जिंदगी
ऐ  मजबूर  हाथों  की  लकीरों  जरा  तोड़  दो    बंदिश

अकेले  चलना  सीखा  था  अकेला    आगे  बढ़  जाऊँगा
यहाँ  पथ  पथ  पर  लोगों  के  रोग  है  और  उनकी  आपसी  रंजिश

ना  आँशु  है  आँखों  में  ,  ना  दिल  पागल  तेरे  नाम  का
ना  कोई  तेरे  नाम  की  कविता  है,  ना  कोई  बर्बाद  खवाइश

दर्द  के  पहलु  सिखुड  से  जाते  है  जब  याद  तेरी  आती  है
अब  क्या  बताऊ  थक  सा  गया  हूँ  और  ख़त्म  हुई  सब  समजाइश

तेरे  लहू  में  आज  भी  में  बहता  हूँ  ये  मेरे  खुदा  को  पता  है
मेरा  दिल  रेगिस्तान  सा  हो  चला  अब  तुझसे  ना  कोई  फरमाइश

अब  आ  भी  जा  ऐ  सनम  मेरी  लाश  को  आग  लगाने  को
जिस  घर  को  खड़ा  किया  था  तेरे  प्यार  ने  उसमे  रही  ना  कोई  नुमाइश

 

By: Chandan Rathore

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