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Navvarsh 2014 ( नववर्ष 2014)

नव  दीपों  की  नव  लोह  जल  रही  है  नयारी
जो  सब  आज  यहाँ  उपस्थित  है  उनका  मै  बहुत  आभारी

कह  रही  समय  की  चिड़ियाँ  बारी-बारी
अब  2013    तो    गया  अब  2014    की  बारी

कट  गए  या  काटे  गए  थे  वो  पल
आ  निकले  फिर  भी  जैसे  फूलों  की  हो  क्यारी

मन  की  गति  आज  समय  से  भारी
उत्पीड़ा,वैराग्य  से  निकल  गई  एक  और    हमारी

आज  शुभ  दिन  है  नववर्ष  का  करेंगे  नई  आज  बात
भूल  जाओंगे  आप  सब  मुझे  भी  2013  की  तरह  (2)
रह  जायेंगी  बस  मेरी  याद

2013    तो  तेरा  था  अपना  कुछ  नही  हाथ
2014  की  गिनती  तो  देखो  आते  ही  दे  दिया  साथ

भूल  कर  पिछली  भूलो  को  आज  करे  नई  शुरुवात
आओ  मिलकर  हम  सब  करे  नववर्ष  का  नया  आगाज

आओ  सब  मिलकर  करते  है  2013    की  आज  अंतिम  विदाई
सब  को  राठौड़  की  तरफ  से  नववर्ष  की  कोटि-कोटि  बधाई

By: Rathore Saab

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