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धोखे में !

जोर खते हैं अपने परिवार को  –  धोखेमें
 दोस्ती को धोखे में ओर प्यार को  –  धोखेमें
 देश से क्या लेना देना उनको ज़रा सोचो
 वो रखेंगे पुरे संसार को  –  धोखेमें
 ‘मत’ काकरनाइस्तेमाल, तुम बहुमत देने में
‘मत’  देमतदेनातुम, किसीगद्दारको-धोखे में
साथ निभाने को अपना मजबूर कर देंगे
 ले लेंगे तुम्हारे ये, ऐतबारको धोखे में
 
कुछ नहीं इन के आगे ये कसाब ये अफज़ल
ये रखेंगे अपनी ही,  सरकार को  –  धोखे में
तुम कितना भी समझो समझदार यहाँ खुद को
पल भर में बना दें उल्लू  ,  होशियार को  –  धोखे में
 
अरे  !  नाव चलाते वो बीच समंदर में
पर रखते हैं वो तो पतवार  –  धोखे में
बाहर से भोले हैं,  अन्दर से हैं भाले
फिजां बना देंगे ये,  बहार को  –  धोखे में 
 
वादे झूठे,  कसमे झूठी सब झूठा झूठा है
क्यूँ चलाते हो ऐसे,  व्यापार को  –  धोखे में
धोखा देना जिनकी फितरत सी बन गई है
अरे  !  दे देंगे वो मात,  सियार को  –  धोखे में
 
बना कर भेजा था जिसने इन्हें इन्सां
कातिल बन कर रखा उस,  निराकार को  –  धोखेमें
समझे  “चरन”  सब सुलझ गया,  पर उलझन बाकी है
बदल दिया सब कुछ,  शुद्ध विचार को  –  धोखे में
 
 

Author : Gurchan Mehta

 

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