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रिलायंस जिओ लगा सकता है, सरकार के राजस्व में भारी चपत

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प्राइवेटाइजेशन और आपसी प्रतिस्पर्धा की आज की दौड़ में वैसे तो किसी भी प्राइवेट कंपनी को या उसकी बनाई मार्केटिंग पॉलिसी को गलत कहना गलत होगा। मगर ऐसी पॉलिसी के बारे में क्या कहा जाए जो कुल मिलकर सिर्फ एक ही कंपनी के लिए फायदेमंद हो और बाज़ार की बाकी कंपनियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के राजस्व को भी भारी बट्टा लगाने वाली हो? रिलायंस जिओ के लांच होने के साथ ही बाज़ार में संचार संबंधी सेवा उपलब्ध करा रही बाकी टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियों की हालत पर जहां बुरा असर दिखना शुरू हो गया है। वहीँ इस महीने होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी पर भी इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है। कई वित्तीय मामलों के जानकारों का ऐसा मानना है कि अब लौ टैरिफ के दबाव एवं पहले से क़र्ज़ की मार झेल रही टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनिया इस नीलामी स्वयं को दूर रखेंगी। केंद्र सरकार ने इस बार स्पक्ट्रम नीलामी के ज़रिये 5.5 लाख करोड़ का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा था जो अब रिलायंस जिओ के लांच हो जाने से अब 60 से 80 करोड़ तक ही हो पाएगा। बता दें टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियों पर फ़िलहाल 4 लाख करोड़ का क़र्ज़ है। ऐसे माहौल में सभी भारतीय टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियों के आने वाले डेढ़ साल तक भारी दबाव में रहने की आशंका है।

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